1789 फ्रांसीसी क्रांति के कारण | Causes of French Revolution in Hindi |
1789 की फ्रांसीसी क्रांति के मुख्य कारण: एक विस्तृत विश्लेषण (संपूर्ण गाइड)

प्रस्तावना (Introduction)
फ्रांसीसी क्रांति (French Revolution) विश्व इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है। यह केवल फ्रांस की घटना नहीं थी, बल्कि इसने पूरी दुनिया को ‘स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व’ (Liberty, Equality, Fraternity) का नारा दिया।
अक्सर छात्र यह प्रश्न पूछते हैं कि आखिर 1789 में ऐसा क्या हुआ कि फ्रांस की जनता अपने ही राजा के खिलाफ सड़कों पर उतर आई? क्या यह सिर्फ भूख की वजह से था या इसके पीछे कोई गहरी साजिश थी?
इस आर्टिकल में हम बहुत ही सरल हिंदी में उन सभी कारणों का विश्लेषण करेंगे, जिससे छात्रों को परीक्षा में पूरे नंबर मिल सकें और सामान्य पाठक भी इसे आसानी से समझ सकें।
फ्रांसीसी क्रांति के प्रमुख कारण (Main Causes of the French Revolution)
क्रांति किसी एक दिन में नहीं होती। यह वर्षों के गुस्से और असंतोष का परिणाम होती है। 1789 की क्रांति के कारणों को हम मुख्य रूप से 5 भागों में बाँट सकते हैं:
- सामाजिक कारण (Social Causes)
- आर्थिक कारण (Economic Causes)
- राजनीतिक कारण (Political Causes)
- बौद्धिक कारण (Intellectual Causes)
- तात्कालिक कारण (Immediate Causes)
आइये, एक-एक करके विस्तार से चर्चा करते हैं।
1. सामाजिक कारण: असमानता और भेदभाव (Social Causes)
18वीं शताब्दी में फ्रांस का समाज तीन वर्गों (Estates) में बंटा हुआ था। यह विभाजन ही क्रांति की सबसे बड़ी जड़ थी।
- प्रथम एस्टेट (The First Estate – पादरी वर्ग):
- इसमें चर्च के पादरी आते थे।
- इनके पास फ्रांस की 10% जमीन थी।
- ये जनता से ‘टाइथ’ (Tithe) नामक धार्मिक कर वसूलते थे, लेकिन खुद सरकार को कोई टैक्स नहीं देते थे।
- ये विलासिता का जीवन जीते थे।
- द्वितीय एस्टेट (The Second Estate – कुलीन वर्ग):
- इसमें राजा के रिश्तेदार, सामंत और बड़े जमींदार शामिल थे।
- इनके पास लगभग 25% जमीन थी।
- ये भी टैक्स नहीं देते थे और किसानों से जबरदस्ती काम करवाते थे।
- सेना और सरकार में ऊँचे पद केवल इन्हीं के लिए आरक्षित थे।
- तृतीय एस्टेट (The Third Estate – आम जनता):
- इसमें फ्रांस की 90% से अधिक आबादी शामिल थी।
- इसमें बड़े व्यापारी, वकील, डॉक्टर (मध्यम वर्ग) और गरीब किसान, मजदूर शामिल थे।
- सारा टैक्स (Tax) केवल इसी वर्ग को देना पड़ता था।
- इनके पास कोई राजनीतिक अधिकार नहीं थे।
निष्कर्ष: जब समाज का एक बड़ा हिस्सा (आम जनता) मेहनत करे और टैक्स भरे, जबकि अमीर लोग मजे करें, तो गुस्सा फूटना स्वाभाविक था।
2. आर्थिक कारण: खाली खजाना और महँगाई (Economic Causes)
कहा जाता है कि “पेट की आग ही क्रांति को जन्म देती है।” फ्रांस की आर्थिक स्थिति 1789 तक बदतर हो चुकी थी।
- लगातार युद्ध और कर्ज: फ्रांस के राजा लुई XVI (Louis XVI) ने अमेरिका की आजादी की लड़ाई में ब्रिटेन के खिलाफ अमेरिका की मदद की। इससे फ्रांस पर 2 अरब लिव्रे (Livres) से ज्यादा का कर्ज हो गया। सरकार का खजाना खाली हो चुका था।
- फिजूलखर्ची: वर्साय (Versailles) का राजमहल अपनी शान-शौकत के लिए मशहूर था। रानी मैरी एंटोनेट (Marie Antoinette) और राजा अपनी विलासिता पर पानी की तरह पैसा बहाते थे, जबकि जनता भूखी मर रही थी।
- अकाल और रोटी का संकट: 1788-1789 की सर्दियों में भयंकर ठंड पड़ी जिससे फसलें बर्बाद हो गईं। फ्रांस में पाव-रोटी (Bread) की कीमतें आसमान छूने लगीं। आम आदमी के लिए रोटी खरीदना असंभव हो गया था। इसे “Great Fear” का समय भी कहा जाता है।
- दोषपूर्ण कर प्रणाली: टैक्स वसूलने का तरीका बहुत गलत था। अमीर लोग (पादरियों और कुलीनों) टैक्स नहीं देते थे और गरीबों पर बोझ बढ़ता जा रहा था।
3. राजनीतिक कारण: अयोग्य नेतृत्व (Political Causes)
अगर राजा समझदार होता, तो शायद स्थिति संभल जाती, लेकिन फ्रांस का दुर्भाग्य था कि उस समय का नेतृत्व बहुत कमजोर था।
- लुई XVI (Louis XVI) का चरित्र: लुई 16वां एक अच्छा इंसान हो सकता था, लेकिन वह एक कमजोर शासक था। उसमें निर्णय लेने की क्षमता नहीं थी। वह अक्सर अपनी पत्नी और दरबारी चापलूसों की बातों में आ जाता था।
- रानी मैरी एंटोनेट की भूमिका: वह ऑस्ट्रिया की राजकुमारी थी और फ्रांस के लोग उसे पसंद नहीं करते थे। उसे “मैडम डेफिसिट” (Madame Deficit – घाटे की रानी) कहा जाता था क्योंकि वह बहुत खर्चीली थी। उसने कथित तौर पर कहा था- “अगर लोगों के पास रोटी नहीं है, तो वे केक क्यों नहीं खाते?” (हालाँकि यह विवादित है, लेकिन यह दर्शाता है कि वह जनता के दुख से कितनी दूर थी)।
- निरंकुश राजतंत्र: राजा का मानना था कि उसे भगवान ने राज करने के लिए भेजा है (Divine Right Theory)। उस पर किसी संसद या कानून का नियंत्रण नहीं था। वह अपनी मर्जी से किसी को भी जेल में डाल सकता था (Lettres de Cachet का दुरुपयोग)।
4. बौद्धिक कारण: विचारकों का प्रभाव (Intellectual Causes)
क्रांति तोपों से पहले विचारों में जन्म लेती है। फ्रांस में उस समय कई महान दार्शनिक हुए जिन्होंने लोगों को सोचने पर मजबूर किया।
- रूसो (Rousseau): उन्होंने कहा, “मनुष्य स्वतंत्र पैदा हुआ है, लेकिन हर जगह वह जंजीरों में जकड़ा है।” उनकी किताब ‘द सोशल कॉन्ट्रैक्ट’ ने लोकतंत्र की नींव रखी।
- मॉन्टेस्क्यू (Montesquieu): उन्होंने ‘द स्पिरिट ऑफ लॉज’ में शक्तियों के बंटवारे (Separation of Powers) की बात की कि राजा के पास सारी ताकत नहीं होनी चाहिए।
- वॉल्टेयर (Voltaire): उन्होंने चर्च के भ्रष्टाचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर जोर दिया।
इन विचारों ने मध्यम वर्ग (Bourgeoisie) को यह अहसास दिलाया कि राजा भगवान नहीं है और जनता को अपने अधिकार मांगने चाहिए।
5. तात्कालिक कारण: एस्टेट्स जनरल की बैठक (Immediate Cause)
उपरोक्त सभी कारण बारूद का ढेर बन चुके थे, बस एक चिंगारी की जरूरत थी। वह चिंगारी थी 5 मई 1789 को बुलाई गई ‘एस्टेट्स जनरल’ (Estates-General) की बैठक।
- राजा लुई XVI ने नए टैक्स लगाने के लिए यह बैठक बुलाई।
- परंपरा के अनुसार, तीनों एस्टेट्स (वर्गों) के पास एक-एक वोट था। इसका मतलब था कि प्रथम और द्वितीय एस्टेट (2 वोट) मिलकर हमेशा तृतीय एस्टेट (1 वोट) को हरा देते थे।
- तीसरे वर्ग की मांग: आम जनता के प्रतिनिधियों ने मांग की कि “हर सदस्य का एक वोट” होना चाहिए, क्योंकि उनकी संख्या सबसे ज्यादा थी।
- राजा ने इस मांग को ठुकरा दिया।
- गुस्से में आकर तीसरे वर्ग के लोग सभा से बाहर चले गए और उन्होंने ‘टेनिस कोर्ट ओथ’ (Tennis Court Oath) ली और खुद को ‘नेशनल असेंबली’ घोषित कर दिया।
यहीं से क्रांति की औपचारिक शुरुआत हुई, जो बाद में 14 जुलाई 1789 को बास्ती (Bastille) के किले पर हमले के साथ हिंसक हो गई।
क्रांति का परिणाम और महत्व (Conclusion & Impact)
फ्रांसीसी क्रांति ने न केवल राजा को गद्दी से हटाया, बल्कि इसने पूरी दुनिया को बदल दिया।
- राजतंत्र का अंत: फ्रांस में सामंतवाद और निरंकुश राजतंत्र खत्म हुआ।
- मानवाधिकार: ‘मानव और नागरिकों के अधिकारों की घोषणा’ (Declaration of the Rights of Man) की गई।
- लोकतंत्र की शुरुआत: यूरोप में लोकतंत्र और राष्ट्रवाद की लहर दौड़ गई।
- समानता: कानून के सामने सभी को बराबर माना गया।
💡 मेरी व्यक्तिगत सलाह (Personal Tip for Students)
अगर आप एक छात्र हैं और इस टॉपिक पर ज्यादा नंबर लाना चाहते हैं, तो:
- फ्लोचार्ट बनाएँ: कारणों को रटने के बजाय एक फ्लोचार्ट बनाएँ (जैसे: सामाजिक -> आर्थिक -> राजनीतिक)।
- कोट्स (Quotes) लिखें: रूसो का कथन “Man is born free…” उत्तर में जरूर लिखें।
- तुलना करें: उस समय के फ्रांस की तुलना आज के किसी भी ऐसे देश से करें जहाँ तानाशाही है, इससे आपका उत्तर प्रभावशाली बनेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: फ्रांसीसी क्रांति कब शुरू हुई? A: 14 जुलाई 1789 को, जब बास्ती के किले को तोड़ा गया।
Q2: फ्रांसीसी क्रांति का मुख्य नारा क्या था? A: स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व (Liberty, Equality, Fraternity)।
Q3: उस समय फ्रांस का राजा कौन था? A: लुई 16वां (Louis XVI)।
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